Baisakhi Hindi Essay

2018 बैसाखी त्यौहार पर निबंध Essay on Baisakhi Festival in Hindi [Punjabi New Year 2018]

बैसाखी सिख लोगों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है जो बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन को सभी सिख लोग अपने नव वर्ष के रूप में भी मनाते हैं।

2018 बैसाखी त्यौहार पर निबंध Essay on Baisakhi Festival in Hindi [Punjabi New Year 2018]

विषय सूचि

2018 बैसाखी त्यौहार का उत्सव Baisakhi Festival Celebration in Hindi

यह त्यौहार सिख लोगों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन होआ जिसमें इस दिन को बहुत ही मिल झूलकर खुशियां मनाते हैं। यह किसानों के लिए और भी महत्वपूर्ण दिन होता है क्योंकि वो अपने फसलों की कटाई की ख़ुशी भी मनाते हैं।

इस दिन को वो अपने नए साल के पहले दिन के रूप में मानते हैं क्योंकि यह समय उनके लिए वर्ष का पहला सबसे ज्यादा ख़ुशी भरा दिन होता है। बैसाखी त्यौहार के दिन सिख लोग अपने अपने पास के गुरुद्वारों में जाते हैं। वहां वो लोग मत्था टेकते हैं और फूल चढ़ाते हैं।

प्रतिवर्ष बैसाखी का त्यौहार 13 और 14 अप्रैल के पर मनाया जाता है। इस दिन को पंजाब में छुट्टी होता है। 

बैसाखी त्यौहार का महत्व Significance of Baisakhi Festival in Hindi

बैसाखी त्यौहार को इस दिन इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन खालसा पन्त की स्थापना हुई थी। बैसाखी के दिन इस पवित्र समाज की शुरुवात सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह जी ने की थी। उससे पहले तीसरे एख गुरु ने पहले ही बैसाखी के उत्सव की शुरुवत कर दी थी।

चाहे गाओं हो यह शहर हर जगह सिख समुदाय के लोग इस त्यौहार को बहुत ही उत्साह के साथ मनाते हैं। यह उनके समाज का एक मुक्जय त्यौहार है और इस दिन को बहुत ही रीती रिवाज़ के साथ मनाया जाता है।

इस दिन सिख लोग अपने परिवार जनों के साथ नाचते हैं, स्वादिष्ट खाना खाते हैं और मज़ा करते हैं। इस दिन वे सभी रंगीन कपडे पहनते हैं और भंगड़ा नृत्य करते हैं जो देखने में बहुत ही अच्छा होता है।

गाओं के क्षेर्रों में यह सिख खेती किसान लोगों के लिए खुशियों भरा होता है। अपने फसल ले लोए कड़ी मेहनत के बाद वो सफलता से अपने फसलों ली कटाई करते हैं। ना सिर्फ पंजाब में उत्तर भारत में दिल्ली, हरयाणा, में भी इस त्यौहार को जगह-जगह उत्साह के साथ मनाया जाता है।

जैसे जैसे दिन बदलते जा रहा है अब बैसाखी त्यौहार को भी थोड़ा नया होते जा रहा है। अब बैसाखी के त्यौहार मेकन लोग एक दुसरे को अच्छे तौफे देते हैं और ख़ुशी प्यार को बंटाते हैं।

पारंपरिक रूप से कई जगह मेला भी लगाये जाते हैं जिसे “बैसाखी मेला” कहा जाता है। वहां बच्चों के लिए सुन्दर खिलौने, स्वादिस्ट मिठाई, और चटपटे खाना, भी मिलता है। इन मेलों में सभी लोग अपने परिवार के लोगों के।साथ घूमने जाते हैं और मज़े करते हैं।

सिख समुदाय के लोगों के लिए यह दिन बहुत मायने रखता है। वहीँ पश्चिम बंगाल में भी इस दिन को अपने नए साल (नव वर्ष) के रूप में मनाते हैं। बौद्ध समुदाय के लोगों का मानना है की इसी दिन भगवान् बुद्ध ने आत्म ज्ञान की प्राप्ति की थी।

बैसाखी


'बैसाखी' को 'वैसाखी' के नाम से भी जाना जाता है। बैसाखी प्रायः प्रति वर्ष 13 अप्रैल को मनायी जाती है किन्तु कभी-कभी यह 14 अप्रैल को पड़ती है। बैसाखी का त्यौहार एक मौसमी त्यौहार है। यह सम्पूर्ण भारतवर्ष में मनाया जाता है किन्तु पंजाब एवं हरियाणा में इसका विशेष महत्त्व है। यह त्यौहार सभी धर्मों एवं जातियों के द्वारा मनाया जाता है। बैसाखी मुख्यतः कृषि पर्व है। यह त्यौहार फसल कटाई के आगमन के रूप में मनाया जाता है।

बैसाखी सिखों का प्रसिद्द त्यौहार है। सिखों के लिए यह पर्व मात्र फसल कटाई आगमन का द्योतक ही नहीं बल्कि सिख भाईचारे और एकता का प्रतीक भी है। वर्ष 1699 में इसी दिन अंतिम सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिखों को खालसा के रूप में संगठित किया था। सिख इस त्यौहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं।

बैसाखी पर्व के दिन समस्त उत्तर भारत की पवित्र नदियों में स्नान करने का माहात्म्य माना जाता है। बैसाखी के पर्व पर लोग नए कपड़े धारण करते हैं। वे घर में हलवा एवं अन्य प्रिय व्यंजनों को बनाते हैं। बैसाखी के पर्व पर लगने वाला बैसाखी मेला बहुत प्रसिद्द है। प्रायः यह मेला नदी के किनारे लगता है। बैसाखी के दिन मेले में बहुत भीड़ होती है। हिंदुओं के लिए यह त्यौहार नववर्ष की शुरुआत है। हिंदु इसे स्नान, भोग लगाकर और पूजा करके मनाते हैं। इस दिन सिख गुरुद्वारों में विशेष उत्सव मनाए जाते हैं। सिख इस त्यौहार को विशेष तरीके से मनाते हैं। वे मंदिर, गुरुद्वारा में जाकर दर्शन करते हैं और पवित्र ग्रन्थ का पाठ करते हैं।
 

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